संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल बने सीएम धामी
युवाओं की मांग पर सीबीआई जांच की संस्तुति
सीएम धामी ने स्वयं धरना स्थल जाकर समाप्त कराया धरना
विपक्ष की छद्म राजनीति पर सीएम धामी का करारा प्रहार
युवा हित में निर्णय लेने में एक बार सबसे आगे दिखे सीएम धामी
उत्तराखण्ड में यूकेएसएसएससी परीक्षा नकल प्रकरण में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून स्थित धरना स्थल पर पहुंचकर युवाओं की मांग के अनुरूप सीबीआई जांच की संस्तुति दी और छात्रों के साथ संवाद किया। इस कदम ने उनकी जनप्रियता, संवेदनशील नेतृत्व और युवा हितैषी छवि को स्पष्ट रूप से सबके समक्ष प्रस्तुत किया है।
सीएम धामी ने छात्रों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों को गंभीरता से लिया गया है और सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच को मंजूरी दे दी गई है। यह निर्णय उनके युवाओं के हित और न्याय के प्रति गहन प्रतिबद्धता का स्पष्ट प्रमाण है।
धरना स्थल पर उनकी उपस्थिति ने न केवल छात्रों का मनोबल बढ़ाया, बल्कि विपक्षी खेमों की राजनीतिक चालों को पूरी तरह नाकाम कर दिया। कई संगठन छात्रों के माध्यम से सरकार पर निशाना साधने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सीएम धामी के संवेदनशील और समर्पित नेतृत्व ने सभी विरोधी प्रयासों को असफल कर दिया।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस पूरे प्रकरण में सीएम धामी ने जो दृष्टिकोण अपनाया, वह केवल प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि सर्वस्पर्शी और एक अभिभावक के रूप में उत्कृष्ट नेतृत्व का उदाहरण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवा हमारी प्राथमिकता हैं और उनके भविष्य और हितों के लिए हर कदम उठाना राज्य का कर्तव्य है।
इस फैसले से यह भी साबित होता है कि सीएम धामी का नेतृत्व केवल नीति बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे हर संवेदनशील परिस्थिति में स्वयं उतरकर निर्णय क्रियान्वित करने में विश्वास रखते हैं। उनके इस कदम ने युवाओं के बीच विश्वास और आशा की भावना पैदा की और यह संदेश दिया कि जब नेतृत्व संवेदनशील और जवाबदेह हो, तो कोई भी विवाद लंबे समय तक नहीं टिक सकता।
इस प्रकार, यूकेएसएसएससी नकल प्रकरण में सीएम धामी का मास्टरस्ट्रोक सीबीआई जांच की मंजूरी और धरना स्थल पर व्यक्तिगत उपस्थिति न केवल विवाद सुलझाने में निर्णायक रहा, बल्कि उन्हें युवाओं के हितैषी, समाज के संरक्षक और संवेदनशील अभिभावक के रूप में स्थापित कर गया। यह घटना उत्तराखण्ड के युवाओं और आम जनता के लिए प्रेरक उदाहरण है कि नेतृत्व केवल निर्णय लेने तक सीमित नहीं, बल्कि सक्रिय संवाद, संवेदनशीलता और निष्पक्ष कार्रवाई के माध्यम से ही समाज में भरोसा और स्थायित्व पैदा कर सकता है।

