31 साल पहले मसूरी की धरती पर आंदोलनकारियों के सीने छलनी कर दिए गए थे। इस बलिदान को याद करने के लिए हर साल शहीद स्थल पर श्रद्धांजलि दी जाती है। लेकिन इस बार का कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा यह सियासी आरोप-प्रत्यारोप और तीखे नारों का मंच भी बन गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मसूरी शहीद स्थल पर पहुँचकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और पुष्पांजलि देकर नमन किया। लेकिन जैसे ही वे कार्यक्रम से निकलकर देहरादून के लिए रवाना हुए, बाहर मौजूद उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। उन्होंने “राज्य-विरोधी मुर्दाबाद” धामी सरकार मुर्दाबाद, और “शहीदों के कातिलों को सज़ा दो” जैसे नारे भी लगाए।
उत्तराखंड क्रांति दल के नेताओं ने आरोप लगाया कि शहीद स्थल अब आम जनता और असली आंदोलनकारियों के लिए नहीं, बल्कि केवल वीआईपी नेताओं के लिए आरक्षित हो गया है। कई पुराने आंदोलनकारियों और यूकेडी के नेताओं को गांधी चौक पर ही रोक दिया गया, जिससे उनका अपमान हुआ। यह कार्यक्रम राजकीय श्रद्धांजलि से ज़्यादा, एक राजनीतिक प्रदर्शन बनकर रह गया है। यूकेडी नेताओं ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आंदोलन के दौरान जिनके आदेश पर गोलियाँ चलीं, वही तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव आज पद्म भूषण से सम्मानित किए जा रहे हैं। ये वही नेता हैं जिनके शासन में उत्तराखंडी नौजवानों पर गोलियां चलाई गई थीं। उन्हें सम्मान देना उत्तराखंड के शहीदों का अपमान है। उन्होने कहा कि बीजेपी का दोहरा चरित्र अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एक तरफ शहीदों को श्रद्धांजलि देने की बात होती है, और दूसरी ओर उनके हत्यारों को सम्मानित किया जाता है। यूकेडी के नेताओं ने सीधे शब्दों में कहा कि उत्तराखंड के शहीदों के हत्यारे आज भी खुलेआम घूम रहे हैं, जिन्हें अब तक सज़ा नहीं मिली। यह प्रदेश सरकार के लिए शर्म की बात है। यूकेडी नेताओं ने कहा कि वे 2027 के विधानसभा चुनाव में मजबूती से उतरेंगे। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों मिलकर भी उन्हें रोक नहीं पाएंगे।जनता अब राष्ट्रीय दलों से ऊब चुकी है, और राज्य की भावना को सिर्फ एक क्षेत्रीय दल ही समझ सकता है। यूकेडी नेताओं ने ऐलान किया कि यदि उनकी सरकार बनी, तो भ्रष्ट अधिकारियों और नेताओं को जेल भेजा जाएगा, चाहे वे कितने भी बड़े पद पर क्यों न हों।

